Tuesday, May 24, 2011

IPL -4 (हंसिनी ) किसका

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी, देवव्रत और सिद्धार्थ नाम के दो भाई 
के बीच एक हंस को लेकर झगडा हो गया |देवव्रत ने उसका शिकार करा था और सिद्धार्थ ने उसे  बचाया था |दोनों के अपने अपने तर्क के बीच फैसला नहीं हो पाया तो उनके पिताजी ने हंस को ही चुनने को कहा |मासूम हंस जिसके तरफ जायेगी हंस के ऊपर अधिकार उसी  का होगा |आगे की कहानी आपको पता है |

इस ipl में भी कुछ वैसा ही नज़ारा है |यहाँ एक मासूम हंस नहीं कमसिन हंसिनी है | नाम बताने की ज़रुरत नहीं | शाहरुख़ के stardom के नीचे इन्होने ने अपना करियर शुरू किया(KKR ) |
 धोनी के साथ उस वक़्त इश्क के चर्चे उडवाए  जब वो मोस्ट eligible bachelor थे|  (CSK )
फिर रणबीर कपूर जो फिलहाल मुंबई इंडियन के लिए ताली बजाते नज़र आ रहे हैं और 
फिलहाल सिद्धार्थ जो RCB के युवा मालिक हैं |

चारो टीम सेमी फ़ाइनल  पहुँच चुकी है |हंसिनी किसे अपना अधिकार देगी देखिएगा ज़रूर .................

Sunday, April 24, 2011

पोपुलर पपलू का हिस्सा बनता जा रहा जंतर -मंतर पर अनसन पर बैठना

अभी हाल में अन्ना हजारे भ्रष्टाचार के तमाम हदों को पार कर रही नेता - पूंजीपति के मिलीभगत के विरोध में अनसन पर बैठ गए | फिर क्या था शिक्षित बेरोजगारों  का हुजूम , समाचार चैनल की टोली , टीवी पर दिखने की चाहत रखने वाले लोग सबों का मानो तांता लग गया |जंतर - मंतर पर ये कोई पहले दफा नहीं हुआ है ,बिनायेक सेन की गिरफ़्तारी के वक़्त भी लोग यहाँ जुटे थे लेकिन टीवी चैनल की उदासीनता उन्हें हिट नहीं करवा पायी |सायद उस वक़्त भारतीय टीम अफ्रीकी दौरे पर थी |आपको याद दिलाता चलूँ विश्व  कप ख़तम होने के बाद ही अन्ना जी का आन्दोलन हिट हो पाया है|

 आम तौर पर  ऐसे अनसन पर बैठे हुए लोगों का काबू में करने का एक सरल उपाय है सरकार के पास - लाठी चार्ज | पर सरकार जंतर -मंतर पर होशियार थी ...इतिहास उन्हें लाजपत  राय पर हुए लाठी चार्ज याद दिला दिया और उन्हें इनका डर हो गया की चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह कहीं  न जन्म ले लें |

15 दिनों तक चले  इस हाई  टेक   ड्रामे का अंत हजारे जी निम्बू पानी पीने के साथ हुआ | पुरे देश में  धधक रही भ्रष्टाचार के खिलाफ ज्वाला को २ घूँट निम्बू पानी ने शांत कर दिया है |फिलहाल जो हो रहा है उसमें हम या आम आदमी नहीं है | अनसन पर बैठने वाले हजारे साहब अब 5 सितारा होटल में हजारों रुपये की dinner कर जा रहे हैं  | आम आदमी ने पसीना बहा अपना काम कर दिया है ,,हजारे साहब के प्रतिकार का इतेज़ार है अब ..

अनसन पर बैठ अपनी मांगे मनवाने का तरीका कोई नया नहीं है लेकिन इसमें भागीदारों की जमात ज़रूर  नयी है |ये अपने  को सिविल कहते हैं |खुद को बुद्धिजीवी मानते हैं |भ्रष्टाचार के सबसे बड़े शोषित मजदूर वर्गों को ये खुद के साथ अनसन पर नहीं बुलाते क्यूंकि उससे समां की खूबसूरती बिगड़ जायेगी |

जिस भारत के 60 % जनता को आन्दोलन का हिस्सा नहीं माना जाता वो सफल होगी मुझे तो संदेह है | पर मुझे   अन्ना हजारे की इमानदारी और कर्त्तव्य - निष्ठा पर कोई संदेह नहीं है | 

दुष्यंत कुमार की पंक्ति को अंत में मै लिखना चाहूँगा 
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए

Friday, January 14, 2011

३जी और महिला विकाश मंत्रालय

३जी  और महिला विकाश मंत्रालय 


आपको शायद अनबना सा लगे ये शीर्षक पर मेरे लिए ये आनो वालों वर्षों में सबसे ज्यादा संवेदेनसिल विषय है.मुझे   बिलकुल भी आश्चर्य   नहीं होगा अगर गूगल और फेसबुक  की तरह ३जी को भी संस्कृति की बुनियाद पर प्रतिबंधित कर दिया जाए कुछ खाप पंचायत में या किसी  और  स्तर पर जैसे राज्य .......
टीवी चंनेल्स या पत्रकारों की पूरी टीम के लिए एक ज़बरदस्त विषय जहाँ वो अपने को आसानी से व्यस्त रखेंगे अपने trp या पाठक के संख्यां को मेन्टेन करते हुए.......... 
मुझे लगता है की ३जी युवाओं के मध्य अंग प्रदर्शन का घिनोना तस्वीर सामने लाने वाला है और ऐसा कहने के लिए मेरे पास पर्याप्त grounds हैं .
जब sms एक नई तकनीक के रूप में सामने आई तो लोगों ने इसके ढेरो सारे लाभ गिनाये और वो अभी  भी हैं पर आप मानो न मानो 95% sms शेरो-सायरी , अश्लील जोक्स या सूचना प्रद्योगिकी से सम्बन्ध नहीं रखने वाले होते हैं ,मेरा मतलब है की उसे कभी भी शेयर किया जा सकता है . इनका इस्तेमाल जारी है . mobiles कंपनी के अलग अलग लुभावने ओफ्फ़र्स आपको अंतहीन मेसेज करने की सुविधा दे  रहे  हैं. आखिर  अब ज़रुरत  हो चुकी है ये.


एयरटेल के nightcalls के बारे  में तो पता ही होगा आपको . महिला विकाश मंत्रालय तो सिर्फ इन काल्स को ही intercept कर अपनी जिंम्मेदारी की तुरंत और बुनियादी ज़रुरत महसूस कर सकती है.
मुझे डर है कहीं ३जी इन nightcalls  के virtual वर्ल्ड को physical न बना दे जो मुझे एकदम से होता नज़र आरहा है . sms  की तरह 95% ३जी का इस्तेमाल यहीं होना मैं दावे के साथ कह सकता हूँ 


३जी बाथरूम  सिंगिंग को बाथरूम गप शाप में बदलने जा रही है . मुझे पूरा विश्वास  है multiplex के trial room में युवतियां  अपने इंनेर garments के भी fitting की राय लेंगी  ,  लड़कों को अपने 6 packs एब दिखाने के लिए 75mm  screen नहीं चाहिए , सब  mobile के screen पर ही संभव  हो  जाएगा .....


चलते चलते  आपको इस दौर  के एक झगडे  के अंश  को सुनाता jaaoon........
sheela munni से कहती है  जा जा  कुछ  भी करती रहूँ  मैं coffee house में अपने boy friend के साथ तेरे  तरह रात   भर  तो ३ जी पे  तो नहीं रहती  न................










Tuesday, January 11, 2011

इस पार प्रिये मधु है, तुम हो , उस पार न जाने क्या होगा .............

दोस्तों ट्रांसलेटर के प्रॉब्लम की वगाह से नए पोस्ट नहीं डाल पा रहा .बच्चन जी एक कविता याद आ रही है .सोचा उसे ही शेयर करूँ आपके साथ
अगर आपको कविता की पंक्तियाँ नहीं दिख रही हों तो mouse को कविता पर double क्लिक करें
उनके लिए जिन्होंने इसे पढ़ रखी कई मर्तबा उन्हें यहाँ पढ़ कर भी अच्छा ही लगेगा और मेरे वो दोस्त जो इस मास्टर पिश से अब तक रूबरू नहीं हो पाए थे वो भी इसे एन्जॉय करेंगे

Friday, January 7, 2011

दर्द गली के कुत्तों की

दर्द गली के कुत्तों की 
कुछ दिन पहले मेरे एक दोस्त ने एक सोसिअल नेट्वोर्किंग साईट पर अपने सुसज्जित कुत्ते को पेश किया  .हाल ही में ख़रीदा है एक विदेशी क्रोस ब्रीड ,सो उनके ही चर्चे हैं . मुझे बताया गया  किस तरह उनके पीछे आने वाला खर्च एक आम आदमी के खर्च से ज्यादा है साथ साथ किस तरह उनके आने से एक बेरोजगार को रोजगार भी मिल गया है. नाम है डेविड.



मैं इन सब बातों को सुनते अपने गली के कुत्तों की ही सोच रहा था. समझ में आया जिस तरह समाज क्लास में बटा है कुत्ते भी बटे हैं उसी माफिक . हैसियत का पैमाना माना जा सकता आँगन में बंधा कुत्ता.. यह गली के कुत्ते जिसे आप आवारा कुत्ते भी कह सकते हो आदि काल से मानव के साथ रहे हैं और तमाम सभ्यता के विकाश   को देखा है. वफादार और मानव का पहला साथी का title भी दिया गया है इन्हें पर हाल के कुछ वर्षों में इन्हें पामिरियन, ग्रेट डैन  ,german shepherd आदि आदि अनेको  जातियों ने इन्हें अपेक्षित बना दिया है , ये अब गलियों में घूमने को विवश हैं. वो खुशनशीब हैं जिनके गले में कोई बेल्ट या पट्टा बंधा  है.इनकी जगह को कुछ परदेशियों ने छीन लिया है .

ये  परदेशी वफादार नहीं बल्कि  घर के सदश्य हैं . इन्हें अपने साथ हर  वक़्त रखा जाता है और इनके हर एक ज़रुरत का ख्याल रखा जाता है , ये हमारे कुत्ते जैसे स्वाबलंबी नहीं हैं. ये कुत्ते हमारे कुत्ते को ऐसी  नज़रों से देखा करते हैं मानो   छुआ छुत की परंपरा अभी भी चली आ रही हो . गली के कुत्तो को अपने भीम राव आंबेडकर का इंतज़ार है.

इनके कुछ मासूम प्रजाति की तरफ हमारी कमसीन युवतियां विशेष आकृष्ट हुई हैं.  उन्हें अपने मुहब्बत को लुटाने का इनसे अच्छा   कोई पात्र नहीं मिल पाया है. यह उनकी कुछ बेहद संवेदेनसिल अंगों के करीब रह उन्हें असीम आनंद की अनुभूति देते हैं  और हमबिस्तर तक होते हैं

गली के कुत्तों का दर्द की सीमा यहाँ ख़त्म हो जा रही है अब वोह और नहीं सह सकते .हजारों साल के साथ और वफादारी के  यह शिला उन्हें हरगिज़ मंज़ूर नहीं है . वोह जवाब चाहते हैं हसीनाओं से की आखिर क्यूँ उन्हें भुला दिया गया .ये विदेशी नश्लो से ज्यादा आनंद देना का भी दावा कर रहे हैं और इनका ये तर्क के हजारों सालों के तजुर्बे के कारन वोह उनकी ज़रूरतों को ज्यादा समझ सकते हैं बिलकुल भी nakara नहीं जा सकता ...

laika जिसे sabse pehle antariksh में jaane का gaurav prapt है inhi के jaati से हैं  ..........
moti, tony, sheru beshak ये नाम zoe ,molly ,katie ,डविड के saamne  कम glamorous lagte हो पर muqabale के लिए hamesha taiyaar हैं

mere एक dost को is तरह in कुत्तो की तरफdari karni aachi नहीं lagi , मुझे salah di yaar tu to sirf ये सोच रहा है की  इन्हें भी un dream girls के paas mauka milna chahiye lekin baad के situtaion imagine kare हैं .......maine जवाब दिया 
khuda jab husna deta है ,to nazakat आ ही jaati है 

saurav